साहित्यान्वेषण

'रफ़ रफ़ मेल' कहानी पाठ एवं परिचर्चा

25 सितम्बर, 2017, जा.मि.इ.
मोहम्मद आसिफ
साहित्यान्वेषण समूह के तत्वाधान में 21 सितम्बर, 2017 को दिन गुरुवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के मुजीब रिज़वी पुस्तकालय में एकल कहानी पाठ एवं परिचर्चाका आयोजन सायं 4:00 बजे किया गया। इस एकल कहानी पाठ के आयोजन में विख्यात कहानीकार अब्दुल बिस्मिल्लाह की कहानी 'रफ़ रफ़ मेल' का पाठन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. हेमलता महिश्वर और अध्यापक डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा तथा डॉ. आसिफ उमर जी मौजूद थे। संचालन का कार्य सुशील द्विवेदी ने किया।
प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. हेमलता महिश्वर, प्रो. आसिफ उमर
(बाएं से दाएं)
कार्यक्रम की शुरुवात करते हुए अब्दुल हासिम (अध्यक्ष, साहित्यान्वेषण) ने साहित्यान्वेषण समूह का परिचय देते हुए समूह के उद्देश्यों से सबको अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी संस्था है जो शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई है जिसमे हम साहित्य, समाज, संस्कृति तथा कलाओं आदि पर विचार विमर्श करते हैं तथा यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ से नए-नए विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए संचालक सुशील द्विवेदी ने कहानीकार अब्दुल बिस्मिल्लाह का परिचय देते हुए उन्हें कहानी 'रफ़ रफ़ मेल' के वाचन के लिए आमंत्रित किया। कहानी की शुरुआत करते हुए कहानीकार ने सर्वप्रथम कहानी का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि 'रफ़ रफ़ मेल' कहानी बस ड्राइवर और कंडक्टर के जीवनपर्यन्त घटने वाली घटनाओं को प्रदर्शित करता है। इस कहानी में आम जीवन की त्रासदी का, रोज़मर्रा की घटनाओं का यथार्थ तथा सजीव चित्रण कहानी के केंद्र बिन्दु के रूप में चित्रित हुई हैं। बसों और सवारी वाहनों पर लिखे शेरोंका चित्रण कहानी की मनोरंजकता के साथ-साथ ड्रावर व कंडक्टर के जीवन की त्रासदी को उभारता है। वैसे देखा जाय तो प्रेमचंद के बाद मुस्लिम पात्रों का चित्रण, श्रमशील व्यक्ति के जीवन की गाथा, आम जीवन के मानवीय मूल्यों को कहानी का विषय बनाने में कहीं ना कहीं अब्दुल बिस्मिल्लाह एक सशक्त कहानीकार के रूप में  दिखाई पड़ते हैं।
कहानीकार ने अपनी कहानी 'रफ़ रफ़ मेल' से मानवीय संवेदनाओं एवं घटनाओं का जो वर्णन किया है उसका प्रतिबिम्ब हर पाठक व श्रोता वास्तविक जीवन के आस-पास महसूस करता है। कहानी का केंद्र बिंदु एक बस ड्राइवर के इर्द-गिर्द चलता रहता है परन्तु एक बस किसी का पूरा संसार भी हो सकता है यह बात प्रो. बिस्मिल्लाह की कहानी 'रफ़ रफ़ मेल' पढ़कर ही समझा जा सकता है। कहानी का पढ़ना या सुनना तब और भी आकर्षक हो जाता है जब लेखक स्वयं उसका वाचन करता है। इससे कहानी के हाव-भाव, उतार-चढ़ाव आदि परिस्थितियों को देखा जा सकता है। प्रो. बिस्मिल्लाह ने अपनी कहानी के अंदर-बाहर लिखे जुमलों मसलन 'देखो मगर प्यार से', 'बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला', 'हॉर्न प्लीज़' आदि का चित्रण आवश्यकतानुसार किया है जो नायक की ज़िन्दगी को सजीव बना देता है। इस तरह के जुमलों के माध्यम से कहानी के रूप में पिरोना एक बड़े कहानीकार होने का परिचय देता है।
किसी भी गोष्ठी की उपयोगिता तभी सार्थक हो सकती है जब उसमें श्रोताओं को आनंद के साथ-साथ अपने समाज के यथार्थ जीवन की झलक दिखाई पड़ती हो। कहीं ना कहीं रफ़-रफ़ मेल कहानी इस दिशा में अनेको प्रश्न खड़े करते हुए सफल दिखाई पड़ती है। कार्यक्रम में श्रोता वर्ग के रूप में बी.ए., एम.ए., बी.ए. मास मीडिया से लेकर एम.फिल, पी.एच.डी. के छात्र उपस्थित थे। कहानी वाचन के बाद श्रोताओं ने अपनी-अपनी संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित टिप्पणियाँ रखीं। प्रेमदत्त पाण्डेय, मोहसिना बानों, राकेश पाण्डेय, मनीष झा, आज़म शेख, रूचि मेहरा, अदनान कफील दरवेश, उमा सैनी, जीनत, रायबहादुर, आस मोहम्मद आदि ने अपनी-अपनी टिप्पणियों के माध्यम से कहानी के अनछुए पहलुओं की ओर भी सबका ध्यान आकर्षित करवाया। डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा जी ने कहानी के आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर अपनी दृष्टि डालते हुए कहा कि इसे मात्र एक आम ड्रावर या बस ड्रावर की कहानी मानना हमारी सबसे बड़ी भूल होगी। इसमें सरल व सहज भाषा का प्रयोग करते हुए आम जीवन की त्रासदी को उभारा गया है। इसके अतिरिक्त आम जीवन में घटने वाली तमाम विसंगतियों का चित्रण आम बोल-चाल की भाषा में सहज रूप से वर्णित कर देना एक बड़े और प्रतिष्ठित कहानीकार की सबसे बड़ी पहचान को दर्शाता है। अंत में कार्यक्रम का समापन करते हुए मोहसिना बानों ने बिस्मिल्लाह सर का आभार प्रकट करते हुए उनका विशेष तौर पर धन्यवाद किया साथ ही साथ डॉ. मुकेश कुमार मिरोठा जी के प्रति एवं साहित्यान्वेषण के सदस्यों सदानंद वर्मा, प्रेमदत्त पाण्डेय, आज़म शेख, अब्दुल हासिम के प्रति आभार प्रकट करते हुए सभा में उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की।

2 comments:

  1. Keep it up Asif. After reading this review as a common reader I am feeling interest to read the kahani in Hindi though I am belong to non-Hindi region. Here is your simple report become a successful one.

    ReplyDelete